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बचपन की भूल – जवानी का खून

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ईश्वर ने पुरूष को शक्तिशाली इंसान बनाकर इस संसार में इसलिए भेजा है कि वह नारी सौन्दर्य के समिश्रण से नई पौध लगाकर कुदरत का सौंपा काम पूरा कर सके दिन भर में इंसान को जो कष्ट और परेशानियां मिलती हैं वह उन सबको रात की विश्राम बेला में रति सुख के साथ भूलकर हर नई सुबह फिर से ताजा और चुस्त होकर अपना कार्य प्रारम्भ कर सके। उचित परामर्श एवं सलाह लिए बिना शादी परेशानी का कारण बन सकती

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सफल जीवन का महत्व

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पूरे संसार का चक्र स्त्री और पुरुष पर आधारित होता है। कोई भी बालक अपने बचपन की सीमा लांघकर जब व्यस्क होकर पुरुष कहलाने लगता है तो ही पुरुष की यही इच्छा होती है कि वह सुन्र स्त्री का पति बन सके और उसके साथ अपना गृहस्थ जीवन सुखमय बिताए तथा स्वस्थ व निरोग संतान उत्पन्न करके अपनी वंश बेल को आगे बढ़ाए मगर संसार में चन्द व्यक्ति ही ऐसे भाग्यशाली होते हैं जो इस गृहस्थ सुख का आनन्द उठाने

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