आयुर्वेदिक इलाज और यूनानी इलाज - समानताएं, अंतर और सही चुनाव

आयुर्वेद और यूनानी भारत की दो सबसे जानी-मानी पारंपरिक जड़ी-बूटी चिकित्सा पद्धतियां हैं। जानें आयुर्वेदिक इलाज में क्या होता है, यह यूनानी इलाज से कैसे अलग है, और दोनों को सुरक्षित तरीक़े से कैसे लें।
आयुर्वेदिक इलाज क्या है?
आयुर्वेद भारत में 3,000 साल से भी पहले शुरू हुई पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है। यह सेहत को तीन दोषों - वात, पित्त और कफ - के संतुलन के रूप में समझाता है, और आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic ilaj) जड़ी-बूटी की दवा, खान-पान, दिनचर्या, योग और पंचकर्म जैसी शुद्धि चिकित्सा से यह संतुलन वापस लाने की कोशिश करता है।
आयुर्वेदिक डॉक्टर BAMS (बैचलर ऑफ़ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की पढ़ाई करते हैं, और भारत में आयुर्वेद आयुष मंत्रालय के तहत मान्य और नियंत्रित है। आम आयुर्वेदिक दवाओं में चूर्ण, आसव-अरिष्ट, घृत (दवा वाला घी) और भस्म शामिल हैं।
यूनानी इलाज क्या है?
यूनानी चिकित्सा (तिब्ब-ए-यूनानी) हिप्पोक्रेट्स और गैलेन की यूनानी चिकित्सा से निकली, इब्ने सीना जैसे अरबी और फ़ारसी हकीमों ने इसे आगे बढ़ाया, और भारत में यह सदियों से प्रचलित है। यह सेहत को चार अख़लात और हर व्यक्ति के मिज़ाज के संतुलन के रूप में समझाती है।
यूनानी इलाज में खान-पान (इलाज बिल ग़िज़ा), दिनचर्या और मालिश व हिजामा जैसी चिकित्सा (इलाज बिल तदबीर) और माजून, ख़मीरा, शरबत और अर्क जैसी दवाएं (इलाज बिल दवा) शामिल हैं। यूनानी हकीम BUMS की पढ़ाई करते हैं, और यूनानी भी आयुष मंत्रालय के तहत नियंत्रित है।
आयुर्वेदिक और यूनानी इलाज में क्या समान है
- दोनों पूरे व्यक्ति का इलाज करते हैं, सिर्फ़ लक्षण का नहीं
- इलाज व्यक्तिगत होता है: एक ही समस्या वाले दो लोगों को अलग योजना मिल सकती है
- खान-पान, नींद, व्यायाम और तनाव इलाज का हिस्सा हैं
- कई जड़ी-बूटियां दोनों में इस्तेमाल होती हैं, जैसे अश्वगंधा (असगंध), आंवला, अदरक (ज़ंजबील), हल्दी और शहद
- दोनों भारत में आयुष के तहत मान्य हैं, और कई दवाओं पर अच्छे क्लिनिकल शोध अभी सीमित हैं
आयुर्वेद और यूनानी में मुख्य अंतर
- सिद्धांत: आयुर्वेद तीन दोषों पर, यूनानी चार अख़लात और मिज़ाज पर आधारित है
- चिकित्सा: आयुर्वेद पंचकर्म के लिए जाना जाता है; यूनानी दलक (मालिश) और हिजामा जैसी तदबीर के लिए
- दवाएं: आयुर्वेदिक चूर्ण, आसव और भस्म; यूनानी माजून, ख़मीरा, शरबत और अर्क
- ग्रंथ और पढ़ाई: आयुर्वेद संस्कृत ग्रंथों पर (BAMS डॉक्टर); यूनानी अरबी, फ़ारसी और उर्दू ग्रंथों पर (BUMS हकीम)
आम बीमारियों में आयुर्वेदिक इलाज
लोग अक्सर जोड़ों के दर्द, बवासीर, पथरी, पाचन, त्वचा और बालों की समस्याओं, शुगर और यौन स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic dawa) ढूंढते हैं। यूनानी में इन सबके लिए अपना तरीक़ा है, और दोनों पद्धतियों में पहला कदम कारण की सही जांच है।
शुगर, दमा या हाई ब्लड प्रेशर जैसी लंबी बीमारियों में आयुर्वेदिक या यूनानी इलाज डॉक्टर की दवाओं के साथ लें - उनकी जगह कभी नहीं। इंसुलिन, इनहेलर या बीपी की गोलियां बंद करना ख़तरनाक हो सकता है।
आयुर्वेदिक या यूनानी दवा सुरक्षित तरीक़े से कैसे लें
- पंजीकृत डॉक्टर को दिखाएं - आयुर्वेद के लिए BAMS डॉक्टर या यूनानी के लिए BUMS हकीम
- सिर्फ़ लाइसेंस वाली दवा लें जिस पर निर्माता का आयुष लाइसेंस नंबर हो
- ऑनलाइन बिकने वाली बिना लेबल की "हर्बल" या "आयुर्वेदिक" गोलियों से बचें - कुछ में भारी धातुएं या छिपी अंग्रेज़ी दवाएं पाई गई हैं
- हर डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट के बारे में बताएं
- स्थायी इलाज या पक्के नतीजे के वादों से सावधान रहें - ऐसे विज्ञापन ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं
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हाशमी दवाखाना एक यूनानी क्लिनिक है: हमारे हकीम यूनानी चिकित्सा करते हैं, आयुर्वेद नहीं। अमरोहा में आयुर्वेदिक इलाज ढूंढने वाले बहुत से लोग प्राकृतिक, पारंपरिक और पूरे व्यक्ति का इलाज चाहते हैं - और यूनानी ठीक यही देता है, डॉ. हाशमी (BUMS, MD) से निःशुल्क और गोपनीय परामर्श के साथ, क्लिनिक में या ऑनलाइन।
अगर आप ख़ास तौर पर आयुर्वेदिक दवा चाहते हैं, तो पंजीकृत आयुर्वेदिक (BAMS) डॉक्टर से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और योग्य डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं है।