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आयुर्वेदिक इलाज: जड़ी-बूटियां, आहार, मसाले और अपने पास आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे ढूंढें

लेखक Hashmi Dawakhanaसमीक्षा: डॉ. हाशमी (BUMS, MD)
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लकड़ी की मेज़ पर ताज़ी हल्दी की गांठें, सूखी हल्दी और हल्दी पाउडर

अश्वगंधा और ब्राह्मी से लेकर त्रिफला, नीम और रोज़ के आयुर्वेदिक मसालों तक - जानें मशहूर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां किस काम आती हैं, आयुर्वेदिक आहार क्या है, और अपने पास योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर या दुकान सुरक्षित तरीक़े से कैसे ढूंढें।

आयुर्वेदिक इलाज में क्या होता है

आयुर्वेद, भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, तीन दोषों - वात, पित्त और कफ - को संतुलन में रखने पर ज़ोर देता है। आयुर्वेदिक इलाज में आमतौर पर जड़ी-बूटियां, आयुर्वेदिक आहार, दिनचर्या, योग और प्राणायाम, और कभी-कभी पंचकर्म जैसी शुद्धि चिकित्सा शामिल होती है, जिसे योग्य आयुर्वेदिक (BAMS) डॉक्टर तय करते हैं।

बहुत से लोग किसी एक जड़ी-बूटी या घरेलू नुस्ख़े से शुरुआत करते हैं। रोज़ की सेहत के लिए यह ठीक है, लेकिन किसी भी लंबी बीमारी में पहले सही जांच ज़रूरी है। आयुर्वेद और यूनानी की तुलना के लिए हमारी गाइड "आयुर्वेदिक इलाज और यूनानी इलाज में अंतर" पढ़ें।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और उनका इस्तेमाल

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): तनाव, नींद और ताक़त के लिए सबसे मशहूर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी। कई शोधों में तनाव में थोड़ी कमी दिखी है। गर्भावस्था में न लें, और थायरॉइड या नींद की दवा लेते हों तो पहले डॉक्टर से पूछें; लिवर पर असर के कुछ दुर्लभ मामले सामने आए हैं।
  • ब्राह्मी (Brahmi): पारंपरिक रूप से याददाश्त और एकाग्रता के लिए, और आयुर्वेद ब्राह्मी कैप्सूल के रूप में ख़ूब बिकती है। असर कुछ हफ़्तों में धीरे-धीरे आता है, और पेट ख़राब हो सकता है।
  • त्रिफला (Triphala): तीन फलों - आंवला, हरड़ और बहेड़ा - का मिश्रण, जो मुख्य रूप से पेट साफ़ करने के हल्के टॉनिक की तरह इस्तेमाल होता है। ज़्यादा लेने से दस्त और मरोड़ हो सकती है।
  • नीम (Neem): ज़्यादातर नीम आयुर्वेद नुस्ख़े त्वचा, बालों और दांतों के लिए हैं, जैसे नीम की पत्तियों का लेप और नीम की दातुन। नीम का तेल कभी न पिएं - यह ज़हरीला है, ख़ासकर बच्चों के लिए - और गर्भावस्था में नीम से बचें।
  • हल्दी, तुलसी, आंवला और गिलोय दूसरी आम आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जो खाने में भी और सप्लीमेंट के रूप में भी इस्तेमाल होती हैं।

तनाव और चिंता के लिए आयुर्वेदिक दवा

तनाव और चिंता के लिए आयुर्वेदिक दवा (ayurvedic medicine for anxiety and stress) के रूप में सबसे ज़्यादा अश्वगंधा और ब्राह्मी इस्तेमाल होती हैं। इनके बारे में शोध उत्साहजनक है लेकिन सीमित, और ये नियमित नींद, व्यायाम, योग और प्राणायाम के साथ सबसे अच्छा काम करती हैं - जो अपने आप में भी मदद करते हैं।

अगर चिंता आपके काम, नींद या रिश्तों पर असर डाल रही है, तो डॉक्टर को दिखाएं। चिंता या डिप्रेशन की डॉक्टर की लिखी दवाएं बिना सलाह के बंद न करें, और अगर ख़ुद को नुक़सान पहुंचाने के विचार आएं तो टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएं।

आयुर्वेदिक आहार

आयुर्वेदिक आहार (ayurvedic diet) खाने को आपके दोष, मौसम और पाचन के अनुसार तय करता है। इसके रोज़ के नियम लगभग सबके लिए अच्छे हैं: ताज़ा, गर्म, घर का बना खाना खाएं; खाने का समय तय रखें; दोपहर का खाना सबसे मुख्य हो; धीरे खाएं और पेट बहुत भरने से पहले रुक जाएं; और तला, पैकेट वाला और बहुत ठंडा खाना कम करें।

अगर आपको शुगर, किडनी की बीमारी या कोई और लंबी बीमारी है, तो डॉक्टर का बताया आहार अपनाएं - आयुर्वेदिक आहार उसके साथ चल सकता है, उसकी जगह नहीं।

रोज़ के खाने में आयुर्वेदिक मसाले

  • हल्दी - काली मिर्च के साथ, जो शरीर में इसके असर को बढ़ाती है
  • अदरक और अजवाइन - पारंपरिक रूप से पाचन और जी मिचलाने में
  • जीरा, धनिया और सौंफ - पेट फूलने और पाचन के लिए जानी-मानी तिकड़ी
  • दालचीनी और इलायची - चाय और मिठाई के लिए गर्म तासीर वाले मसाले
  • रसोई में इस्तेमाल होने वाली मात्रा ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है; मसालों के गाढ़े सप्लीमेंट अलग बात हैं और सिर्फ़ सलाह पर लें

ब्रांडेड आयुर्वेदिक प्रोडक्ट: क्या जांचें

ऑर्गेनिक इंडिया का त्रिफला चूर्ण (Organic India triphala powder) या महर्षि आयुर्वेद का अश्वगंधा (ashwagandha Maharishi Ayurveda) जैसे प्रोडक्ट दवा की दुकानों और ऑनलाइन ख़ूब बिकते हैं। ब्रांड कोई भी हो, सावधानियां वही हैं: पैक पर आयुष मैन्युफ़ैक्चरिंग लाइसेंस नंबर, पूरी सामग्री, ख़ुराक और एक्सपायरी देखें, भरोसेमंद दुकान से ख़रीदें, और डॉक्टर को बताएं कि आप क्या ले रहे हैं।

स्थायी इलाज या पक्के नतीजे का वादा करने वाले किसी भी प्रोडक्ट से सावधान रहें - ऐसे दावे ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं। हाशमी दवाखाना का यहां बताए गए किसी भी ब्रांड से कोई संबंध नहीं है।

अपने पास आयुर्वेदिक डॉक्टर या आयुर्वेदिक दुकान कैसे ढूंढें

  • जब आप "ayurvedic doctor near me" या "ayurveda near me" खोजें, तो BAMS डिग्री और राज्य के आयुर्वेद या भारतीय चिकित्सा बोर्ड में पंजीकरण देखें - पंजीकरण नंबर पूछें
  • कई ज़िलों में सरकारी आयुष अस्पताल और वेलनेस सेंटर कम ख़र्च में आयुर्वेदिक इलाज देते हैं
  • "ayurvedic shop near me" के लिए ऐसी लाइसेंस वाली दुकान चुनें जहां आयुष लाइसेंस नंबर वाले प्रोडक्ट हों और जो ख़ुराक व दवाओं के आपसी असर के बारे में बता सके
  • चमत्कारी इलाज का वादा करने वाले, बिना लेबल का चूर्ण बेचने वाले या डॉक्टर की दवा बंद करने की सलाह देने वाले विक्रेताओं से बचें
  • अमरोहा का हाशमी दवाखाना यूनानी क्लिनिक है, आयुर्वेदिक नहीं - अगर आप प्राकृतिक, पारंपरिक इलाज चाहते हैं तो निःशुल्क और गोपनीय यूनानी परामर्श ले सकते हैं; ख़ास तौर पर आयुर्वेदिक दवा के लिए पंजीकृत BAMS डॉक्टर को दिखाएं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ज़्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए कम समय तक सामान्य ख़ुराक आमतौर पर ठीक रहती है। गर्भावस्था में न लें, थायरॉइड की बीमारी हो या नींद की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें, और आंखें पीली या पेशाब गहरा दिखे तो इसे बंद करके डॉक्टर को दिखाएं।

कोई एक सबसे अच्छी दवा नहीं है। अश्वगंधा और ब्राह्मी सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती हैं, और नींद, व्यायाम और प्राणायाम भी उतने ही ज़रूरी हैं। जो चिंता कम न हो, उसमें डॉक्टर को दिखाएं, और डॉक्टर की दवा कभी ख़ुद से बंद न करें।

राज्य बोर्ड में पंजीकृत BAMS डॉक्टर देखें, उनसे पंजीकरण नंबर पूछें, या अपने पास के सरकारी आयुष अस्पताल या वेलनेस सेंटर जाएं।

बहुत से लोग कब्ज़ में कुछ समय के लिए त्रिफला लेते हैं। इससे दस्त और मरोड़ हो सकती है, और गर्भावस्था, पुराने दस्त या आंतों की बीमारी में बिना सलाह के ठीक नहीं है। लंबे समय तक रोज़ लेने के बारे में डॉक्टर से बात करें।

यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और योग्य डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं है।

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